हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के सबसे चहेते चेहरों में से एक, सौरभ द्विवेदी ने इंडिया टुडे ग्रुप से इस्तीफा दे दिया है। लल्लनटॉप के फाउंडिंग एडिटर और इंडिया टुडे हिंदी के एडिटर के रूप में 12 साल की लंबी पारी के बाद सौरभ ने 5 जनवरी को सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की। यह खबर हिंदी मीडिया जगत में बड़े चर्चा का विषय बन गई है।

क्या कहा सौरभ ने?

सौरभ ने अपने एक्स (ट्विटर) पोस्ट में लिखा:"

शुक्रिया @TheLallantop
मान, पहचान और हिम्मत के लिए। 

एक अल्पविराम के बाद नई यात्रा की तैयारी।"

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने नासिर काज़मी की शायरी का सहारा लिया:"

यूँ ही आबाद रहेगी दुनिया

हम न होंगे कोई हमसा होगा

उन्होंने बताया कि वे कुछ समय का ब्रेक लेंगे, आत्ममंथन करेंगे और फिर आगे की योजना साझा करेंगे।

इंडिया टुडे ग्रुप का बयान

ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कalli पुरी ने कहा कि सौरभ ग्रुप के होमग्रोन टैलेंट हैं। उन्होंने लल्लनटॉप को युवाओं की पसंदीदा प्लेटफॉर्म बनाया। अब सौरभ अपनी क्रिएटिव एनर्जी को ग्रुप के बाहर अन्य माध्यमों में लगाना चाहते हैं।लल्लनटॉप की कमान अब कुलदीप मिश्रा संभालेंगे, जो एडिटोरियल हेड होंगे, जबकि प्रोडक्शन की जिम्मेदारी रजत सैन के पास रहेगी। दोनों ही लल्लनटॉप के शुरुआती टीम मेंबर्स हैं।

लल्लनटॉप की यात्रा और सौरभ की भूमिका

2016 में इंडिया टुडे ग्रुप के तहत शुरू हुआ लल्लनटॉप हिंदी डिजिटल न्यूज का एक अनोखा प्रयोग था। सौरभ द्विवेदी ने इसे आम बोलचाल की भाषा में गंभीर राजनीतिक विश्लेषण, लंबे इंटरव्यू और युवा केंद्रित स्टोरीटेलिंग से लोकप्रिय बनाया।

  • द लल्लनटॉप शो, नेतानगरी, दुनियादारी जैसे प्रोग्राम्स ने लाखों युवाओं को न्यूज से जोड़ा।
  • योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव जैसे बड़े नेताओं के इंटरव्यू से प्लेटफॉर्म ने अपनी विश्वसनीयता बनाई।
  • आज लल्लनटॉप के यूट्यूब चैनल पर 35 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं।

सौरभ ने लल्लनटॉप को सिर्फ न्यूज पोर्टल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक फेनॉमिनन बनाया।

असली मालिक कौन?

लल्लनटॉप को सौरभ द्विवेदी ने ही फाउंड किया था, लेकिन यह शुरू से इंडिया टुडे ग्रुप (आज तक की पैरेंट कंपनी) का हिस्सा रहा है। कई लोग इसे सौरभ का "अपना" मानते थे, क्योंकि उनकी स्टाइल और विजन से यह पहचाना जाता था। अब उनके जाने से कई फैंस कह रहे हैं - "लल्लनटॉप बिना सौरभ के गाजर का हलवा बिना गाजर के जैसा।"हाल ही में लल्लनटॉप से अभिनव पांडे जैसे पत्रकार भी अलग होकर अपना वेंचर शुरू कर चुके हैं।

आगे क्या?

सौरभ ने ब्रेक के बाद नई शुरुआत का संकेत दिया है। मीडिया में अटकलें हैं:

  • अपना इंडिपेंडेंट डिजिटल प्लेटफॉर्म या यूट्यूब चैनल शुरू करेंगे।
  • फिल्मों या टीवी में क्रिएटिव रोल निभा सकते हैं (पहले इंटरव्यू में उन्होंने इसकी इच्छा जताई थी)।
  • कुछ का मानना है कि वे हिंदी पत्रकारिता को नई ऊंचाई देने वाला नया प्रोजेक्ट लॉन्च करेंगे।

राजदीप सरदेसाई जैसे वरिष्ठ पत्रकारों ने भी सौरभ को शुभकामनाएं दीं और कहा कि उनकी कमी खलेगी।

सौरभ द्विवेदी का जाना हिंदी डिजिटल मीडिया के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है। लल्लनटॉप आगे कैसे चलेगा और सौरभ की नई यात्रा क्या रंग लाएगी - यह देखना रोचक होगा।